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लापरवाही 7 की जगह सिर्फ 2 डॉक्टर, 35 हजार की आबादी 100 गांवों की ज़िन्दगी दांव पर

इलाज के लिए आज भी क्षेत्रवासी बरेली, रायसेन, भोपाल जाने को मजबूर

शब्द अग्नि l राज ठाकुर बाड़ी

बाड़ी. नगर सहित आस-पास के ग्रामीण अंचलों के बाशिंदों को पिछले एक दशक से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रखा गया है। इन सालों में शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन होकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तब्दील तो हो गया, लेकिन न तो क्षेत्र के हिसाब से डॉक्टर है और न ही जांच उपकरण। मुकम्मल इलाज के लिए आज भी क्षेत्रवासी बरेली, रायसेन, भोपाल जाने को मजबूर है। कई लोग झोलाछाप डॉक्टर से इलाज कराने के लिए मजबूर है।

महज अस्पताल भवन, सुविधाएं नदारद

तहसील मुख्यालय सहित राष्ट्रीय राजमार्ग-45 पर स्थित होने से शासन की मंशा पूर्ति स्वरूप अस्पताल भवन तो है। भवन पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लिखा देखकर न जाने कितने मरीज इलाज की आस लेकर यहां पहुंचते हैं, लेकिन डॉक्टर, जांच उपकरण और दवाइयों की अनुपलब्धता की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलते ही निराश होकर लौट जाते हैं। बाड़ी के आधे-अधूरे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बाड़ी तहसील मुख्यालय की करीब 35 से

झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय

शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों के साथ आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं नहीं होने से तहसील मुख्यालय पर झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानें खुली हैं। जो साधारण मरीज को गंभीर मरीज में तब्दील कर भोपाल रेफर करते हैं। कई बार मरीज गंभीर हो गए तो कभी उनकी जान भी चली गई, लेकिन इन झोलाछाप डॉक्टरों पर आज तक किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही विभाग द्वारा नहीं की गई है। इन डॉक्टरों के पास उपचार की कोई वैध उपाधि भी नहीं है।

अधिक की आबादी के अलावा आस पास के करीब 100 गांवों, कस्बों की आबादी को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने का भार है। इलाज के लिए यहां गांव-गांव से मरीज पहुंचते हैं। स्वास्थ्य की मूलभूत सुविधा नहीं मिल पाने के कारण विवश होकर निजी चिकित्सक के घर पर और क्लीनिक पर इलाज कराने को मजबूर होते हैं। गरीब तो अपना इलाज सरकारी अस्पताल के भरोसे पर ही टिके रहते हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 7 डॉक्टर होना चाहिए, जबकि लगातार 2 डॉक्टर ही उपलब्ध है। एक दशक पूर्व यहां 4 डॉक्टर पदस्थ थे, आज मात्र एक महिला चिकित्सक और एक संविदा चिकित्सक मौजूद है।

महिला चिकित्सक का आलम यह है कि सिर्फ सुबह की पाली में कभी-कभार आती है। इस कारण महिला मरीजों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पुरुष डॉक्टर पूरे मरीजों को नहीं देख पाते और अपने निवास पर ही इलाज करते हैं। मरीजों को अन्य जगह इलाज कराने के लिए जाना पड़ता है।

गर्भवती महिलाओं को करते हैं रेफर

प्रदेश सरकार शासकीय चिकित्सालय में प्रसव के लिए अनगिनत योजनाएं संचालित कर सुविधाएं मुहैया करा रही है, ताकि प्रसव पीड़ा में योग्य देखरेख व तुरंत इलाज मिल सके। नगर के अस्पताल में पहुंचने वाली गर्भवती महिला और उसके परिजनों को हमेशा डॉक्टर को मनाने में समय लग जाता है। उसके बाद डॉक्टर ज्यादातर महिलाओं को भोपाल ही रेफर करते हैं। इस मामले में कई बार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थानीय लोगों द्वारा हंगामा भी किया जा चुका है।

क्या कहते हैं अधिकारी

बाड़ी तहसील की आबादी के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कम से कम 6 डॉक्टर विशेषज्ञ एवं महिला चिकित्सक की आवश्यकता है। अभी मौजूद डॉक्टरों से पूर्ति नहीं हो पाती है। इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। अन्य कमियों के बारे में जांच करेंगे और सुधार करेंगे।

डॉ. हेमंत यादव, बीएमओ

Shabd Agni
Author: Shabd Agni

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