हरित खाद से बढ़गी खेत की उर्वरता,
शब्द अग्नि/ सीमान्त राव बन्सोड़
बालाघाट – कृषि में रासायनिक उर्वरकों पर बढ़ती निर्भरता को कम करने और मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता को बनाए रखने के लिए किसान अब हरित खाद की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इसी क्रम में विकासखंड बिरसा के ग्राम टिंगीपुर के प्रगतिशील कृषक श्री भैयालाल गौतम ने अपने 3 एकड़ खेत में ढेंचा की फसल लगाकर क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ढेंचा एक महत्वपूर्ण हरित खाद फसल है, जिसे खेत में उगाकर बाद में मिट्टी में मिला दिया जाता है। इससे भूमि में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है तथा मिट्टी की संरचना में सुधार होता है। ढेंचा की फसल वायुमंडलीय नत्रजन को भूमि में स्थिर करने की क्षमता रखती है, जिससे मिट्टी को प्राकृतिक रूप से नत्रजन प्राप्त होता है और आगामी फसलों के लिए पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ जाती है।
कृषक श्री भैयालाल गौतम ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों की बढ़ती लागत को देखते हुए उन्होंने ढेंचा की खेती को अपनाया है। ढेंचा की फसल को खेत में पलटने से मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है, भूमि भुरभुरी बनती है तथा सूक्ष्म जीवों की सक्रियता में वृद्धि होती है। इससे फसल उत्पादन की लागत कम होने के साथ-साथ भूमि की दीर्घकालिक उत्पादकता भी बनी रहती है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ढेंचा जैसी हरित खाद फसलों का उपयोग प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देता है। यह फसल मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने, पोषक तत्वों की उपलब्धता सुधारने तथा रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विशेष रूप से धान एवं अन्य खरीफ फसलों की बुवाई से पूर्व ढेंचा का उपयोग किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
Author: Shabd Agni
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