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मौलाना मुहम्मद इलियास कंधलवी ने दीन की दावत को बनाया जीवन का मिशन

सन् 1920 के दशक में मेवात से शुरू हुआ तब्लीगी काम आज दुनिया के कई हिस्सों तक पहुंचा

 

शब्द अग्नि /अब्दुल कलाम मंसुरी। मौलाना मुहम्मद इलियास कंधलवी (रह.) का नाम तब्लीगी जमात की स्थापना और दीन की दावत के लिए किए गए प्रयासों के साथ प्रमुखता से लिया जाता है। 1885 में उत्तर प्रदेश के कांधला में जन्मे मौलाना इलियास ने धार्मिक शिक्षा हासिल की और अपना जीवन मुसलमानों को बुनियादी इस्लामी शिक्षाओं से जोड़ने के लिए समर्पित किया। उनका इंतकाल 1944 में हुआ।

1920 के दशक में मेवात क्षेत्र में धार्मिक जागरूकता के लिए मौलाना इलियास ने व्यापक प्रयास शुरू किए। उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों से नमाज, दीन की बुनियादी बातों और धार्मिक जीवन अपनाने की अपील की। मेवात में लगातार यात्राओं, बैठकों और जमातों के माध्यम से यह काम आगे बढ़ा और बाद में दिल्ली सहित अन्य क्षेत्रों तक फैल गया।

तब्लीगी जमात की शुरुआत की तारीख के संबंध में विभिन्न स्रोतों में 1926 और 1927 दोनों का उल्लेख मिलता है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार 1926 के आसपास मेवात में यह अभियान संगठित रूप लेने लगा, जबकि 1927 में निजामुद्दीन से इसके विस्तार को विशेष रूप से जोड़ा जाता है।

 छह सिद्धांतों पर जोर

तब्लीगी जमात के काम में छह बुनियादी बातों को प्रमुखता दी जाती है—कलिमा, नमाज, इल्म व जिक्र, इकराम-ए-मुस्लिम, इखलास-ए-नियत और दावत व तब्लीग। इनका उद्देश्य व्यक्तिगत सुधार, नमाज की पाबंदी, धार्मिक ज्ञान, मुसलमानों के सम्मान और दीन की दावत पर जोर देना है।

इस काम की एक खास विशेषता यह रही कि लोगों को दीन की बातें सीखने और दूसरों तक पहुंचाने के लिए कुछ समय निकालने की प्रेरणा दी गई। तीन दिन, चालीस दिन और चार महीने जैसी अवधियों में जमातों के साथ निकलने की परंपरा भी इसी कार्य-पद्धति का हिस्सा बनी।

सियासत से दूरी, व्यक्तिगत सुधार पर जोर

तब्लीगी जमात को सामान्यतः एक गैर-सियासी धार्मिक आंदोलन के रूप में वर्णित किया जाता है, जिसका मुख्य जोर राजनीतिक गतिविधियों के बजाय व्यक्तिगत धार्मिक सुधार और दावत पर रहा है। ऑक्सफोर्ड हैंडबुक के 2026 में प्रकाशित अध्याय में भी इसके विकास, छह उसूलों और गैर-सियासी रुख को आंदोलन की प्रमुख विशेषताओं में शामिल किया गया है।

मौलाना इलियास कंधलवी (रह.) की सबसे बड़ी पहचान यही रही कि उन्होंने दीन की दावत को केवल भाषणों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि स्वयं लोगों के बीच जाकर धार्मिक जागरूकता का काम किया। उनके प्रयासों से शुरू हुआ यह आंदोलन आगे चलकर दक्षिण एशिया से निकलकर दुनिया के विभिन्न हिस्सों में पहुंचा।

 

Shabd Agni
Author: Shabd Agni

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