श्रावणी पूर्णिमा पर पाली में शहीद हुए हजारों पालीवाल ब्राह्मणों को किया नमन, सीहोर सहित आष्टा-शाहगंज में निभाई परंपरा
शब्द अग्नि / हिमालय गोहिया
सीहोर / श्रावणी पूर्णिमा और रक्षाबंधन के अवसर पर जहां शहर में पर्व की धूम रही, वहीं पालीवाल ब्राह्मण समाज ने अपनी 735 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए रक्षाबंधन का पर्व नहीं मनाया। समाजजनों ने पाली में हुए ऐतिहासिक हमले में शहीद हुए हजारों पालीवाल ब्राह्मणों की स्मृति में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को याद किया।
पालीवाल ब्राह्मण समाज के अनुसार श्रावणी पूर्णिमा के दिन पाली में हुए हमले के दौरान बड़ी संख्या में ब्राह्मणों ने धर्म और मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। इसी शहादत की याद में समाज द्वारा रक्षाबंधन पर्व नहीं मनाने की परंपरा आज भी निभाई जा रही है। समाजजनों ने शहीदों को नमन करते हुए उनके त्याग और वीरता को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर समाज अध्यक्ष कृष्णकांत पालीवाल, सचिव प्रदीप पालीवाल, कोषाध्यक्ष नरेंद्र पालीवाल, मीडिया प्रभारी सक्षम पालीवाल तथा उपाध्यक्ष संजय पालीवाल बरखेड़ा सहित कार्यकारिणी के सदस्य मौजूद रहे।
कार्यकारिणी में मोहन पालीवाल, अशोक पालीवाल, संजय पालीवाल इछावर, अनिल पालीवाल, बाबू दादा, बृजेश पालीवाल , राजेश पालीवाल भाऊँखेड़ी , राजेंद्र पालीवाल नेहरू कॉलोनी, राज रतन पालीवाल, सोनू पालीवाल ,लीलाधर पालीवाल, महेश पालीवाल, गोपाल पालीवाल और मदनलाल पालीवाल सहित अन्य समाजजन शामिल रहे।
वहीं पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमारी पालीवाल, पूर्व मंत्री अंजू पालीवाल, कीर्ति पालीवाल, बबली पालीवाल, मीना पालीवाल, निधि पालीवाल, आशा पालीवाल और प्रभा पालीवाल सहित समाज की महिलाओं ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
समाजजनों ने कहा कि रक्षाबंधन का दिन उनके लिए अपने पूर्वजों के बलिदान को याद करने का अवसर है। शहीदों की स्मृति में समाज द्वारा वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाया जा रहा है। सीहोर के साथ आष्टा और शाहगंज में भी पालीवाल समाज ने शहादत की स्मृति में रक्षाबंधन नहीं मनाया । वहीं आष्टा और शाहगंज में भी यह परंपरा जारी रही वहाँ मनीष पालीवाल , मदनलाल पालीवाल सहित पालीवाल ब्राह्मण समाज के लोग उपस्थित थे ।
Author: Shabd Agni
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