बांस आधारित रोजगार, उद्यमिता तथा उद्योगों को बढ़ावा देने के संबंध में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित
शब्द अग्नि/ सीमान्त राव बन्सोड़
बालाघाट । कलेक्टर मृणाल मीना की अध्यक्षता में शनिवार 30 मई को बालाघाट बांस विकास प्राधिकरण के गठन एवं जिले में बांस आधारित रोजगार, उद्यमिता तथा उद्योगों को बढ़ावा देने के संबंध में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी डॉ. ए.के. भट्टाचार्य सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में बालाघाट को आदर्श बांस जिला घोषित किए जाने के प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के कुल बांस क्षेत्र का लगभग 40 प्रतिशत तथा कुल बांस उत्पादन का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा बालाघाट जिले में है। जिले के आदिवासी एवं विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के लिए बांस आजीविका का प्रमुख साधन होने के बावजूद उन्हें इसके व्यापार से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में आदर्श बांस जिला घोषित होने से बांस आधारित विकास योजनाओं को गति मिलेगी और विभिन्न विभागों के प्रयासों में बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।
डॉ भट्टाचार्य ने बताया कि बांस विश्व में सबसे तेजी से बढ़ने वाली एक मात्र वनस्पति है जिसे हम देख सकते है। 27 फरवरी 2002 को भारत में नेशनल बांस मिशन की स्थापना की गई थी। बांस एक मात्र ऐसी वनस्पति है, जिसका 100 प्रतिशत भाग उपयोग होता है। बांस हमें रोटी, कपड़ा और मकान तीनों देता है। बांस कृषि एवं वन दोनों की फसल है। बांस पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार है। बांस का पौधा सबसे अधिक आक्सीजन देता है और 35 प्रतिशत कार्बन को अवशोषित कर लेता है।
Author: Shabd Agni
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