शब्द अग्नि / जमीर मंसूरी
खरगोन / जल हमें कृष्ण के गुणों और लीलाओं की याद दिलाता है, इस पर ध्यान लगाने के अलावा, हम अपने दैनिक जीवन में जल का उपयोग करके उनके प्रति अपनी जागरूकता बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए, बुनियादी स्वास्थ्य के लिए हमें पीने और नहाने के लिए स्वच्छ जल की आवश्यकता होती है, और खाना पकाने और कपड़े व घर साफ करने के लिए भी इसकी आवश्यकता होती है। हमें उस व्यवस्था की आवश्यकता है जो कृष्ण ने वाष्पीकरण और वर्षा के माध्यम से स्वच्छ जल की आपूर्ति के लिए स्थापित की है। कम से कम, हमें इन उपहारों के लिए भगवान का नियमित रूप से धन्यवाद करना चाहिए, जो हमारे शरीर को जीवित रखते हैं। इसके अलावा, हमें जल के लिए आभारी होना चाहिए क्योंकि यह कृष्ण को याद करने का एक प्रेरक है, क्योंकि यह स्मरण उनके प्रति हमारी सेवा और प्रेम को बढ़ाएगा, और हमारी भक्ति के पौधे को सींचेगा उक्त उदगार श्री महामृत्युंजय धाम गांधीनगर में श्री पुरुषोत्तम मास के मंगल शुभावसर पर मातृ शक्ति संगठन द्वारा जल की महत्ता को लेकर आयोजित श्रीमद भागवत कथा में परम पूज्य व्यास गादी से भागवताचार्य पंडित श्री बृजेश जी शर्मा ने व्यक्त किए। आपने गोपाल कृष्ण की अलौकिक लीला का बखान किया इस अवसर पर बाल गोपाल मण्डली ने मटकी फोड़कर दूध दही का रसास्वादन किया।
कथा के दौरान अखिल विश्व गायत्री परिवार की पूर्व महिला मंडल जिला संयोजिका वर्तमान में आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी की खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर,बड़वानी चार जिलों की प्रभारी श्रीमती सुनीता पाटीदार ने मातृशक्ति को संबोधित करते हुए पानी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए की जल की तरह सरस जल बने सब में मिल जावे आपने कहा कि प्रकृति का न करे हरण आओ बचाए पर्यावरण पंचम दिवस की कथा विराम पर आरती मुख्य मनोरथी सुधा देवी सोलंकी एवं सह मनोरथी श्रीमती कामिनी भारत सिंह मण्डलोई द्वारा की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
Author: Shabd Agni
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