श्री देवनखेड़ी सरकार हुए कार्यक्रम में शामिल
शब्द अग्नि / हिमालय गोहिया (सीहोर)
सावन के पावन माह के अंतिम सोमवार को धर्मनगरी में भक्ति और आस्था का अद्भुत सैलाब उमड़ पड़ा। अवसर था देवाधिदेव महादेव बाबा श्री महाकाल की भव्य और दिव्य ‘शाही अंतिम सवारी’ का। पूरे नगर को दुल्हन की तरह सजाया गया था और सुबह से ही शिवभक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
यह ऐतिहासिक एवं भव्य शाही सवारी नगर के गायत्री मंदिर से अत्यंत गरिमामय माहौल में प्रारंभ हुई। जैसे ही बाबा महाकाल का रथ मंदिर प्रांगण से रवाना हुआ, पूरा वातावरण “हर-हर महादेव”, “जय श्री महाकाल” और “बम-बम भोले” के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। ढोल-नगाड़ों, ताशों, शंखध्वनि और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर और ऊर्जावान धुनों ने समूचे मार्ग को भक्तिमय बना दिया। जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा बाबा की पालकी पर पुष्पवर्षा की जा रही थी।
शाही सवारी का मुख्य आकर्षण बाबा श्री देवनखेड़ी सरकार की गरिमामयी उपस्थिति रही। जब बाबा देवनखेड़ी सरकार इस भव्य यात्रा में सम्मिलित हुए, तो श्रद्धालुओं का आनंद दोगुना हो गया और पूरा जनसमुदाय भाव-विभोर हो उठा। दो महान दिव्य सत्ताओं के इस पावन समागम ने इस शाही यात्रा को अत्यंत विशेष और अलौकिक बना दिया।
गायत्री मंदिर से प्रारंभ होकर यह शाही सवारी नगर के सभी प्रमुख एवं मुख्य मार्गों से होती हुई आगे बढ़ी। मार्ग में स्थान-स्थान पर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों द्वारा स्वागत द्वार बनाए गए थे। श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह फलाहार, ठंडे पेयजल और महाप्रसाद की व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं।
नगर भ्रमण करते हुए, जन-जन को अपना आशीर्वाद देकर बाबा श्री महाकाल की यह दिव्य सवारी अंततः प्राचीन शंकर मंदिर पहुंची। वहां विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार और भव्य महाआरती के साथ शाही सवारी का समापन हुआ। इसके पश्चात उपस्थित अपार जनसमूह में महाप्रसाद का वितरण किया गया। अंतिम सावन सोमवार पर निकले इस अलौकिक डोले में हज़ारों की संख्या में महिला, पुरुष व बच्चे शामिल हुए और पुण्य लाभ अर्जित किया।
Author: Shabd Agni
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