सरकारी आदेशों को ठेंगा
पुलिस और आबकारी विभाग की संरक्षण में शराब ठेकेदारों के हौसले बुलंद, खुलेआम परोसा जा रहा ‘शराब और कबाब
दैनिक शब्द अग्नि प्रकाश पटेल
खंडवा / मध्य प्रदेश सरकार ने भले ही नई आबकारी नीति 2026-27 में अहातों पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया हो, लेकिन पंधाना नगर में इन सरकारी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। पंधाना थाना क्षेत्र के अंतर्गत संचालित दो शराब दुकानों के ठेकेदार इतने बेखौफ हो चुके हैं कि वे प्रशासन की नाक के नीचे धड़ल्ले से अवैध अहाते चला रहे हैं। आरोप है कि यह पूरा खेल पंधाना थाना और आबकारी विभाग के सीधे संरक्षण में खेला जा रहा है।
दुकान के बाजू में ही सजी है महफिल
प्रदेश सरकार का स्पष्ट आदेश है कि शराब दुकान पर या उसके आस-पास बैठकर शराब पीने की सख्त मनाही है। इसके बावजूद पंधाना में शराब दुकानों के ठीक बाजू से अवैध अहाते आबाद हैं। स्थिति यह है कि अगर आप इन ठेकों के पास से गुजरें, तो पाएंगे कि शराब ठेकेदार ग्राहकों को बकायदा ‘शराब और कबाब’ परोस रहे हैं। ठेकेदारों में प्रशासनिक कार्रवाई का रत्ती भर भी खौफ नहीं बचा है, मानो उन्होंने कानून को अपनी जेब में रख लिया हो।
सिस्टम की चुप्पी और भ्रष्टाचार की बू
आखिर क्या वजह है कि लगातार खबरें प्रकाशित और प्रसारित होने के बावजूद इन अवैध अहातों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है? सूत्रों की मानें तो इस ‘अवैध धंधे’ के सुचारू संचालन के लिए शराब ठेकेदारों द्वारा पंधाना पुलिस और आबकारी विभाग को हर महीने एक बड़ी राशि (मोटा चढ़ावा) पहुंचाई जा रही है। यही वजह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस खुली गुंडागर्दी और नियम विरुद्ध काम पर आंखें मूंद कर बैठे हैं।
उच्च स्तरीय जांच की दरकार
स्थानीय नागरिकों और जागरूक वर्ग का कहना है कि जब तक पंधाना पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत रहेगी, तब तक सरकार के आदेश केवल कागजों तक ही सीमित रहेंगे। जरूरत इस बात की है कि इन ठेकेदारों को संरक्षण देने वाली पंधाना पुलिस और संबंधित आबकारी अधिकारियों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। यदि निष्पक्ष जांच होती है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि कैसे ये भ्रष्ट अधिकारी सरकार की साख पर बट्टा लगा रहे हैं।
प्रशासन से सवाल:
अब देखना यह है कि जिले के आला अधिकारी और जिला प्रशासन इस खबर के बाद नींद से जागते हैं या फिर पंधाना में पुलिस और शराब माफियाओं का यह नापाक गठजोड़ ऐसे ही बदस्तूर जारी रहेगा। जनता मांग कर रही है कि नियमों को ठेंगा दिखाने वाले ठेकेदारों के साथ-साथ उन्हें संरक्षण देने वाले वर्दीधारियों पर भी सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
Author: Shabd Agni
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