अदालत को 30 दिन में फैसला करने के निर्देश रीवा के लंबित प्रकरण पर न्यायालय की नाराजगी
शब्द अग्नि /रीवा। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रीवा के 21 वर्ष पुराने लंबित मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए निचली अदालत को 30 दिनों के भीतर प्रकरण का निपटारा करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि वर्षों तक मामलों का लंबित रहना न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता और न्याय पाने के अधिकार दोनों को प्रभावित करता है।
लंबित मामलों पर जताई चिंता
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि दो दशक से अधिक समय तक किसी मामले का विचाराधीन रहना गंभीर चिंता का विषय है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न्याय में अनावश्यक देरी से पक्षकारों को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए ऐसे मामलों का शीघ्र निराकरण आवश्यक है।
30 दिन की तय की समय-सीमा
हाईकोर्ट ने संबंधित निचली अदालत को निर्देश दिया है कि मामले की नियमित सुनवाई करते हुए 30 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय पारित किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि बिना ठोस कारण के सुनवाई में अनावश्यक स्थगन न दिया जाए।
समयबद्ध न्याय पर जोर
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को लंबे समय से लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। न्यायालय ने संकेत दिया कि समय पर न्याय मिलना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और न्यायिक प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा खींचने की प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए।
Author: Shabd Agni
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