मिलते ही छलक पड़े आंसू
रक्षाबंधन पर भावुक हुआ भाई-बहन का मिलन, बहनों ने लिया दोबारा अपराध न करने का वचन
शब्द अग्नि / रमाकांत मंसोरिया
भैरूंदा / शुक्रवार को रक्षाबंधन के पवित्र पर्व पर भैरूंदा सब जेल में भावुक कर देने वाला माहौल देखने को मिला। अपने कैदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए बड़ी संख्या में बहनें जेल पहुंचीं। भाई-बहन की मुलाकात के दौरान कई बहनों की आंखों से आंसू छलक पड़े। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें मिठाई खिलाई और भविष्य में दोबारा अपराध न करने का वचन लिया।
जेल मुख्यालय के निर्देशानुसार रक्षाबंधन पर्व पर सब जेल भैरूंदा में बंदियों की बहनों के लिए विशेष मुलाकात की व्यवस्था की गई थी। मुलाकात का समय दोपहर 2 बजे तक निर्धारित किया गया। बाहर से आने वाली कुछ बहनें देरी से पहुंचीं, जिन्हें भी मानवीय आधार पर राखी बांधने और भाइयों से मुलाकात का अवसर दिया गया।
भाइयों को देख बहनों के छलक पड़े आंसू

जेल में अपने भाइयों को सामने देखकर बहनों की खुशी के साथ अपनों से दूर होने का दर्द भी साफ नजर आया। कई बहनें भाई को देखते ही भावुक हो गईं। किसी ने भाई की कलाई पर राखी बांधी तो किसी ने भाई को गले लगाकर अपने आंसुओं को रोक नहीं पाई। बहनों ने भाइयों से कहा कि वे अपनी गलतियों से सबक लें और भविष्य में ऐसा कोई काम न करें, जिससे उन्हें दोबारा जेल आकर राखी बांधने की नौबत आए।
प्रतिबंधित सामग्री पर रही सख्ती
विशेष मुलाकात के दौरान जेल प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। मोबाइल फोन, गुटखा, सिगरेट, बीड़ी सहित अन्य प्रतिबंधित सामग्री को जेल के अंदर ले जाने पर पूरी तरह रोक रही। बहनों को राखी, कुमकुम, चावल, फल, नारियल और रुमाल जैसी सीमित वस्तुएं ले जाने की अनुमति दी गई। पैक मिठाई भी निर्धारित मात्रा में ले जाने की अनुमति रही, जबकि घर का बना अथवा अन्य खाद्य पदार्थ प्रतिबंधित रखा गया।
देरी से पहुंचने वाली बहनों को भी दी सुविधा
सब जेल भैरूंदा के जेलर जितेंद्र अम्बुलकर ने बताया कि जेल मुख्यालय के निर्देशानुसार रक्षाबंधन पर बंदियों को उनकी बहनों से विशेष मुलाकात और राखी बांधने की सुविधा दी गई। मुलाकात का समय सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित किया गया था। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंधित वस्तुओं पर रोक रखी गई। उन्होंने बताया कि प्रयास रहा कि किसी कारणवश देरी से पहुंचने वाली बहनों को भी संभव हो तो मुलाकात का अवसर दिया जाए।
Author: Shabd Agni
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