दमोह जनपद में पंचायत भ्रष्टाचार की खुली पोल
शब्द अग्नि / अनुराग बजाज दमोह जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत उमरी में पंचायत स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार की एक और तस्वीर सामने आई है। पांचवें राज्य वित्त आयोग मद से करीब 5 लाख 29 हजार रुपये की लागत से बनाई गई सीसी सड़क महज दो महीने के भीतर ही उखड़कर कीचड़ में तब्दील हो गई। जिस सड़क पर ग्रामीणों को वर्षों तक सुविधा मिलनी थी, वह पहली ही बारिश में अपनी बदहाली की कहानी बयां करने लगी। सड़क की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं और पूरे मामले ने जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जनपद पंचायत के सीईओ की लापरवाही
हैरानी की बात यह है कि दमोह मुख्यालय से महज 5 से 7 किलोमीटर दूर स्थित इस निर्माण कार्य के दौरान न तो जनपद पंचायत के सीईओ हलधर मिश्रा ने मौके का निरीक्षण किया और न ही संबंधित उपयंत्री देवी दयाल बेन गुणवत्ता जांच के लिए पहुंचे। परिणाम यह हुआ कि शासन के लाखों रुपये घटिया निर्माण की भेंट चढ़ गए और सड़क पहली ही बरसात में जवाब दे गई।
कथित मिलीभगत का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि जनपद क्षेत्र में ऐसी कई ग्राम पंचायतें हैं जहां अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताएं की जा रही हैं। कई जगह लाखों रुपये के भुगतान तो कर दिए गए, लेकिन मौके पर या तो अधूरा निर्माण हुआ या फिर बेहद घटिया गुणवत्ता का काम किया गया।
उमरी की यह सड़क अब केवल एक निर्माण कार्य की विफलता नहीं, बल्कि पंचायतों में कथित भ्रष्टाचार और निगरानी व्यवस्था की पोल खोलने वाला उदाहरण बन गई है। सवाल यह है कि जब मुख्यालय के इतने नजदीक बने कार्यों की भी गुणवत्ता पर कोई नजर नहीं रखी जा रही, तो दूरदराज की पंचायतों में सरकारी धन का किस तरह उपयोग हो रहा होगा। अब ग्रामीण दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ कड़ी जांच तथा कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
Author: Shabd Agni
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