बेरोजगार युवा और निवेश के दावे: एमओयू तो हुए… लेकिन नौकरी कब मिलेगी ?
शब्द अग्नि / इंदौर । मध्य प्रदेश में निवेश बढ़ाने और उद्योगों को आकर्षित करने के लिए सरकार लगातार बड़े-बड़े *एमओयू (MoU)* और निवेश प्रस्तावों का ऐलान कर रही है। करोड़ों रुपये के निवेश दावों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल प्रदेश के युवाओं के सामने है — **इन निवेश समझौतों का जमीन पर असर कब दिखेगा और रोजगार के अवसर कब मिलेंगे ?
निवेश के आंकड़े बड़े, रोजगार की तस्वीर साफ नहीं
सरकार की ओर से समय-समय पर उद्योगपतियों के साथ समझौते किए जाते हैं। इनमें आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, फार्मा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश के दावे किए जाते हैं। लेकिन स्थानीय युवाओं का कहना है कि निवेश आने के बाद भी रोजगार के लिए उन्हें दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। युवाओं का सवाल है कि अगर हजारों करोड़ का निवेश आ रहा है तो हमारे शहर और जिले के युवाओं को कितनी नौकरियां मिलेंगी ?
स्थानीय युवाओं की चुनौती
ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं के सामने सबसे बड़ी समस्या है
- उद्योगों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता नहीं मिलना
- तकनीकी कौशल की कमी
- रोजगार के लिए महानगरों पर निर्भरता
- सरकारी भर्तियों में देरी
- निजी क्षेत्र में स्थायी नौकरी के कम अवसर
कई युवा डिग्री हासिल करने के बाद भी रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। उद्योग लगेंगे तो रोजगार भी बढ़ेगा ?*विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एमओयू साइन होना पर्याप्त नहीं है। निवेश को धरातल पर उतारने के लिए जरूरी है की
- जमीन आवंटन की प्रक्रिया तेज हो
- उद्योगों को समय पर अनुमति मिले
- स्थानीय युवाओं के लिए स्किल ट्रेनिंग की व्यवस्था हो
- कंपनियों में स्थानीय भर्ती का लक्ष्य तय किया जाए
राजनीतिक बहस भी तेज
विपक्ष लगातार सरकार के निवेश दावों पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि घोषणाएं ज्यादा हो रही हैं, लेकिन वास्तविक रोजगार के आंकड़े सामने नहीं आ रहे। वहीं सरकार का दावा है कि नए उद्योगों से आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे और प्रदेश को औद्योगिक हब बनाने की दिशा में काम जारी है।
ग्राउंड रिपोर्ट का बड़ा सवाल
एमओयू की फाइलों से निकलकर उद्योग जमीन पर कब उतरेंगे ?निवेश की चमक के बीच बेरोजगार युवाओं के हाथ में नौकरी का नियुक्ति पत्र कब आएगा ? आने वाला समय तय करेगा कि निवेश के ये दावे वास्तव में रोजगार की नई कहानी लिखते हैं या सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाते हैं।
Author: Shabd Agni
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