अपने जीवन में धर्म, भक्ति और सेवा को अपनाकर श्रीकृष्ण के आदर्शों पर चलें – श्री कमलेश्वरानंद जी महाराज
शब्द अग्नि / अनुराग बजाज दमोह – धर्ममय वातावरण में धरमपुरा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस, 18 जुलाई 2026 (शनिवार) को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु उस समय भावविभोर हो उठे, जब भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की लीला का जीवंत वर्णन किया गया।
बुंदेलखंड के प्रसिद्ध कथावाचक श्री कमलेश्वरानंद जी महाराज द्वारा जैसे ही कंस के अत्याचारों, देवकी-वसुदेव की पीड़ा और आधी रात के दिव्य क्षणों का वर्णन किया गया, पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। वातावरण में भक्ति, आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला।
श्रीकृष्ण जन्म की झांकी को अत्यंत आकर्षक ढंग से सजाया गया था। बाल गोपाल के रूप में सजे भगवान के विग्रह के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। जैसे ही जन्मोत्सव का समय आया, घंटे-घड़ियाल, शंखनाद और भजनों की मधुर ध्वनि के बीच भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य उत्सव मनाया गया।

कथावाचक श्री कमलेश्वरानंद जी महाराज ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग पर भावपूर्ण प्रवचन देते हुए कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान स्वयं अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक घटना नहीं, बल्कि यह संदेश है कि सत्य और धर्म की जीत निश्चित है। कंस जैसे अत्याचारी चाहे कितने भी बलवान क्यों न हों, उनका अंत निश्चित है। जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इसलिए हम सभी को चाहिए कि अपने जीवन में धर्म, भक्ति और सेवा को अपनाकर श्रीकृष्ण के आदर्शों पर चलें।
इस अवसर पर महिलाओं ने मंगलगीत गाए, वहीं श्रद्धालुओं ने नृत्य कर अपनी भक्ति प्रकट की। बाल गोपाल का झूला झुलाया गया तथा प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
पूरे आयोजन में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, जिसने कथा के आध्यात्मिक माहौल को और अधिक दिव्यता प्रदान की। आयोजकों द्वारा उत्कृष्ट व्यवस्था की गई, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
यह श्रीकृष्ण जन्मोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में प्रेम, करुणा और धर्म के संदेश को भी सशक्त रूप से प्रसारित करने में सफल रहा।
श्रीमद्भागवत कथा में मुख्य श्रोता श्रीमती लक्ष्मीबाई नन्ने भाई बरदिया सहित बड़ी संख्या में श्रृद्धालुओं की उपस्थिति रही।
Author: Shabd Agni
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